भ्रष्टों का भ्रष्टाचार
दिनांक – 2 दिसम्बर 2010
लगातार होते घोटालो पर बहुत कुछ कहने की जरुरत नही है। इसके बारे मे सबको पता है, परन्तु कहना यह है कि जब उचें पद पर बैठे जब लोग भ्रष्टाचार करते हैं, तो केवल वह पद ही नही शासन सत्ता के सभी लोगों पर अंगुली उठना तो स्वभाविक हैं। लेकिन यह जरुरी नही की सभी लोग ऐसे हैं। हमारे समाज मे भ्रष्टाचार के बहुत से उदाहरण है, एक बह भ्रष्ट जो पढ़ा लिखा नही होता हैं, कुछ मजबूरीयो आदत और संस्कारो के कारणों से भ्रष्ट बन जाते है,या बना दिये जाते हैं। परन्तु उच्चे पादान पर बैठे लोग मुखतः दो कारणो से ऐसे भ्रष्टाचार करते हैं एक तो लालच दूसरा अपने सामाजिक स्तर को बनाये रखने के लिए रुपयो की जरुरत को पूरा करने के लिए ऐसा करते हैं। छोटा भ्रष्ट आदमी छोटे-छोटे भ्रष्टाचार करता है, पकड़े जाने पर पुलिस के डंन्डे खाता और कुछ दिनो तक हवालात मे बंन्द रहता है। भ्रष्टाचार चाहे पैसे की हो या लाखो रुपयो की, भ्रष्टाचारी ही कहलायेगा, इन दोनो मे अन्तर केवल यह है कि बड़े लोग, बड़े भ्रष्टाचारी छोटे भ्रष्ट लोग छोटे भ्रष्टाचारी हैं। अपने पहुँच और रुपयो के बल पर बड़े भ्रष्टाचारी पकड़ मे नही आते फिर भी यदा कदा पकड़ लिए जाते हैं, तो तोड़ जोड़ करके बच निकलते हैं। अगर समाज के आर्दश ही ऐसा करेगा तो देश के साधारण जनता के लिए भी सब कुछ जायज होगा। फिर नियम कानून और आदर्श की हत्या ही हो जायेगी। क्या नियम,कानून और आर्दश केवल निचले पादान पर बैठे आदमीयो के लिए है ? अभी तक कई भ्रष्टाचार सामने आये है और शायद कई एक का खुलासा भी नही हो पाया । अब हो सकता एक बहुत बड़ी घटना की बारी हो जिससे सभी लोगो का ध्यान भ्रष्टाचार के इस मुद्दे पर से हट जाए।
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