दिनांक – 28-11-10 का हिन्दुस्तान के प्रथम पृष्ट साँतवा कालम घोटाले के सबूत गुम पढ़ा कहने की जरुरत नही है, कि घोटालो का बाजार गर्म है। अभी हाल मे हुए आर्दश सोसायाटी घोटाले के बहुत दिन नही हुए। और अभी तक कोई पकड़ा भी नही गया, इतने मे महत्वपूर्ण दस्तावेज गोल हो गये। यह सबूत गोल हुए, किसने यह काम किया ? इस बात के दो पहलू ही हो सकते हैं पहला - ये बही लोग और उन्ही के लोग हैं जो घोटाले से सरोकार रखते हैं। या सरकार मे बैठे महत्व पूर्ण व्यक्तित्व के लोग हैं। जिनको बचाने के लिए सरकार भी एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैँ । सबूत गुम तो अपराधी की सजा भी गुम । इसका मतलब यह हुआ कि घोटाला अगर नही हुआ है, और जीनके उपर इल्जाम लगे हैं, अगर वे लोग पाक-साफ होते तो सबूत के कागज कभी भी गुम न हुए होते यह बात अपने आप यह साबित करता है कि घोटाले हुए और जीनके उपर दोष लगे, बह सही है। जीनके हाथो मे जनता ने देश की शासन सत्ता की बाग ड़ोर सौंप रखा है । क्या देश का शासन सुचारु रुप से चलाने मे सक्षम हैं ? फिर भी इस देश और सत्ता चल रही है ये सब है न मजेदार बात यह सब कौन क्यूँ सोचे मेरा घर परिवार तो चल रहा हैं खा-कमा रहे हैं आखिर क्या जरुरत अनावश्यक पंगा लेने का जो जैसा करेगा वैसा भरेगा। खाओ पियो और ऐस करो । ( संतोषम् परंम धर्म्) अपने आप को देखो , अपने आप तक सोचो इसी मे खुशहाली है। ( होहिए बही जो राम रची राखा।) हम करना चाहे भी तो क्या कर सकते हैं ? कुछ भी तो नही। यही तो हमारी आजादी है। यदि हमारा देश 300 बर्षो तक के बजाए 600 बर्षो तक गुलाम रहता तो इसमे कोई आश्चर्य की बात नही है, तभी तो आज भारत आजाद है। और हम आजाद देश के आजाद नागरीक हैं। फिर भी हमारा भारत महान ।
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