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Saturday, October 2, 2010

आखिर कब तक

आखिर कब तक

आखिर कार अयोध्या मंन्दिर मामले पर हाईकोर्ट का फैसला आ ही गया। कोर्ट व्दरा साक्षो और सबूतो के आधार पर बहुत ही सुझबुझ से लिया गया निर्णय है। इस निर्णय मे दोनो पक्षो का ध्यान रखते हुए तर्क संगत न्याय की भूमिका निभाया गया, किसी को नाराज नही किया न ही किसी को बहुत ज्यादा खुश भी किया गया। ज्यादातर लोग यह सोच रहे थे, कि फैसला किसी एक पक्ष को जायेगा। परन्तु ऐसा नही हुआ । अब कुछ लोग राजनीति से प्रेरित हो सकते हैं। अभी एक पक्ष के कुछ लोग पूर्ण रुप से संन्तुष्ट नही ऐसा जान पड़ता है । आगे दोनो पक्षो के लिए अभी सुप्रीमकोर्ट का रास्ता खुला हुआ है । हमारे समाज मे कुछ लोग ऐसे हैं, जो विना कुछ सोचे समझे लड़ने के लिए हमेशा तैयार रहते है.या किसी भी मुद्दे को राजनीति जामा पहनाने लगते हैं। उनका काम केवल लड़ाना-लड़ाना ऐसे लोगों से मेरा केवल इतना कहना है, कि दुसरे के तवे पर रोंटीयाँ सेकना बन्द करें। लड़ने-लड़ाने का इतना शौक है, तो देश के अंन्दर नही जाकर युध्द के मैदान मे अपने वतन के लिए लड़े।

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